आदर्श आचार्य

 Mhabhart kal ke mhan yodha dornacharya
आदर्श आचार्य का  अर्थ  है जो अपने आचरण से प्रभावती करे। आदर्श आचर्य का समाज में महत्वपूर्ण
भूमिका है। जिसके कारण  उनके नाम इतिहास के पने में लिपिबद्ध हो चूका है। 

जैसे - दोर्णाच्राय ,धौम्य ऋषि आदर्श आचार्य शील दयावान , श्रद्धावान , धैर्य और वात्सल्य की भावने से 
ाओत-पॉट होता है। जो अपने पलकों में इन्ही गुणों का समावेश करने के लिए प्रयत्नशील होता है। 

आदर्श आचारत्या मेहनती एव लगनशील होते है। उन में स्पस्ट वक्ता का गुण का विद्यमान होता है। 
जो  अपने बालोको में भी  समावेश कराते  है। आदर्श आचार्य माता-पिता और गुरु तीनो का रूप दिखाई 

देता है , क्योकि बलाया वस्था  में गुरु माता-पिता की तरह उनका संरछण करते है। सबसे पूर्व  गुरु कुल 
वनो और  होता था। किन्तु आधुनिक युग में कांगड़ी , शांतिनिकेतन ,नालंदा विश्वविद्यालय  ,आज  भी है। 

आदर्श आचर्य जीवन भर अपने शिष्यों के लिए पेरणा का स्रोत रहे है। और उनकी मदद करने में अहम भूमिका निभाया है।  जैसे - चाणक्य ने चनरगुप्त की मदद की दौरान ने अर्जुन की मदद की 

                                               अतः हमें आदर्श आचार्य की वाणी वयवहार और कार्यकुशलता का 
अनुकरण कर अपना  मार्ग  प्रसस्थ    बनाना चाहिए। 

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