गीता के 15 उपदेश। जो भगवन श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिये

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गीता उपदेश जानने से पहले आपको गीता के बारे जानना होगा। गीता  रचयिता भगवान कृष्ण वो 15  उपदेश जो
भगाण कृष्ण अर्जुन को बताये थे।   इस उपदेश के पढ़ने के बाद आपको अर्जुन जैसा ज्ञान हो जायगा। 

गीता के उपदेश 

1  अपने गुसे पर काबू रखना 

जो मनुष्य अपने गुसे पर काबू नहीं रख पता है। क्युकी क्रोध से भ्रम पैदा होता और उसकी बूढी नस्ट हो जाती 
इसलिए हमें अपने घुसे पर नियंत्रण रखना चाहिये। 

2 .  देखने का नजरिया हमेश सही रखना चाहिये 

जो भी व्क्यती अपने ज्ञान को अपने कर्म को एक सामान देखता  हमेश सही होता है। 

3 . अपने मन पे नियंत्रण रखना 

गीता के सार के अनुसार जो वयक्ति अपने मन पे नियंत्रण नहीं रख पता है।   उसका मन सबसे बड़ा सत्रु बन जाता है। इसलिए हमें अपने मन पे हमेशा नियंत्रण रखना चाहिए।

४. खुद का आंकलन 

अगर  आप आंकलन दूसरे से काम करते है तो। गीता के उपदेश के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जब अर्जुन से 
 अर्जुन अपने अज्ञान को हमेशा अपने आप  दूर रखो।  अपने आप को अनुशासित में रहना चाहिए। 

5 . खुद का निर्माण 


 अपने  आप  पे हमेशा विश्वाश रखो और  जो जैसा विश्वाश करता है, वैसा ही बनता जाता है। इसलिए हमेशा अपने को शरेष्ट समझना चाहिए। 

6 .  मनुष्य को हर काम का फल मिलता है। आपने सुना ही होगा कर्म करो तभी तो फल मिलेगा 

 अगर आप कोई भी काम कर रहे है। वह  व्यर्थ नहीं होता है ,  हर एक काम जो आप  कर रहे है। 
उसका फल आपको एक न एक दिन जरूर मिलेगा।  चाहे वो बुरा कर्म हो या अच्छा। 

7 . हमेशा लगातार अभयास करते रहना जरूररी है। 

अगर आपका मन असांत है। तो उस पर नियंत्रण करना मुश्किल है। अगर लगातार अभयास करने 
से आप अपने मन को नियंत्रण कर सकते है। 

8 . विश्वाश के साथ विचार 

आप कुछ भी कर सकते है लेकिन उस पर हमेश विश्वाश और चिंतन करना चाहिए। 

9 . तनाव को दूर करे 

हमेश अप्रकृतिक तत्व से तनाव उत्पन होता है। इसलिए हमेशा अपने आप को आप्रकृतिक तत्व से दूर रखे /

10. सबसे पहले अपना काम करे 

हमेशा अपने काम को करे और दूसरे काम करने से पहले सबसे पहले अपना काम पुराण करे। 

११. इस तरह के काम से दूर रहे 

जो वयक्ति निष्क्रियता को काम में देखता है और काम निष्क्रियता में वही  वयक्ति बुद्धिमान होता है। 

12 अपने काम हमेशा ढूंढे   

 जब आप अपने काम में आनंद को धुंध लेते है तो , तभी आप अपने काम को पुराण कर सकते है। 

13 .  हमेशा अच्छा काम करते रहे 

भगवान श्री कृष्ण के अनुसार हमेशा हमें अपने अच्छे काम करते रहना चाहिए और व्यर्थ की बातो में अपना 
समय नहीं बर्बाद करना चाहिए। 

14. सच्चे दोस्त कौन 

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन के दुख घड़ी में हमेशा साथ रह कर ये साबित कर दिया है।  की 
सच्चा मित्र वह है जो सुख घडी में हमेशा साथ रहता है। 

15 . अनुभवों से हमेशा सिख ले 

        नाकि आप अपने गुरु सीखे हमेशा अपने अनुभवी , माता -पिता बड़े बुजुर्ग से सीखते रहेंगे तो 
आप हमेशा अपने कार्य में सफल रहेंगे। 

 यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिभरवती भारत। 

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम।।

परित्राणाया साधूनां विनाशय च दुष्कृताम।  

धर्मसंस्थापनाथार्य सम्भवामि युगे युगे।।


                                              अर्थ 



जब जब धर्म की हानि होती जब जब अधर्म में वृद्धि  होती  है। 

तब तब सत्यपुरुषो के उधार के लिए अधर्मियों के विनाश के लिए 

और धर्म की पूण: स्थापना के लिए मै ही जनम लेता हु ,  ये प्रत्येक युग 

में होता आया है और आगे भी ऐसा ही होगा। 














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