Guru nanak jaynyti?

गुरु नानक जी का जन्म 14 अप्रैल 1469 को इनका जन्म हुआ था।  हम लोग गुरु नानक जयंती को एक पर्व के रूप में मानते हैं। गुरु नानक जी सिख धर्म के संस्तापक थे।
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गुरु नानक जी सिख धर्म के पहले गुरु थे। इस पर्व के शुभ अवसर पे कई लोग  इस इस गुरु नानक जी के जयंती धूम धाम  से मानते है। 


गुरु नानक जयंती का क्या महत्व है ?

गुरु नानक जयंती सीखो के लिए सबसे बड़ा महापर्व है। इस महापर्व के शुभ  अवसर पे कई लोग अखंड पाठ 
का आयोजन करवाते है। सीखो के महान गुरु और प्रथम गुरु है। इस उत्साह उत्साह के अवसर पर  मोहले  आदि को सजाया जाता है।  लोग जुलुस निकलते है और भजन कीर्तन आदि होते है। 

गुरु नानक जी के उपदेश 

उनका कहना था की ईश्वर एक है। वह सर्वत्र  है सभ कुछ उनही में है। ईशवर हम सबके पिता है। हमें सबसे प्रेम पूर्वक रहना चाहिए। 

गुरु नानक जी का कहना था की हमेश अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए। और हमेश खुश रहना 
चाहिए। 

केवल वो बोले जो तुम्हार लिए सामान लेकर आये है। 

गुरु नानक जी की कुछ जरुरी बाते 

गुरु नानक जी सीख धर्म के निर्माता थे। वह सीखो के पहले गुरु भी थे।  उनकी पूजा समझ भगवन के सामान ही होता है। गुरु नानक जी ने सीखो पवित्र ग्रन्थ के रचना सुरु की जो -गुरु ग्रन्थ के नाम से जाना जाता था। 
क्यकि वह ग्रन्थ सीखो का केंद्र है। 

कैसे मनाई जाती है गुरु नानक जयंती 

गुरु  नानक जी के जयंती के  लिए हाथी घोड़े आदि की से धूम धाम से मनाया जाता है। 
उप्लक्षय विशाल   नगर कीर्तन आदि मनाया जाता है। इस दौरान कई जगह पे परताभ फेरी भी निकले जाती है। 

गुरु नानक देव की शिक्षा 

उनका कहना था की हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब भाई -भाई 

और    हमेशा एक  ईशवर  की पूजा करना चाहिए।


































































































































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