बसंत पंचमी हमलोग क्यों मानते है। इसका क्या महत्व है।

बसंत पंचमी हमलोग क्यों मानते है। इसका क्या महत्व है।  माघ मास में हिन्दू  धर्म में इसका बहुत ही महत्व है। इसके अल्वा बहुत सरे ऐसे पर्व है। जो इसे माह में पड़ते है। और सरस्वती पूजा यानि बसंत पंचमी का पर्व भी इसी माघ मास्स में ही आता है। प्रति वर्ष माघ माह के शुल्क पक्ष के पछमी तिथि का ये त्यौहार पड़ता है। मुख्य रूप से इस दिन माता सरस्वती के पूजा करने का विधान है।

 इस दिन हंसवाहिनी ,ज्ञानदायनी जो ज्ञान की दाता है, इस शुभावसर हमलोग माता सरस्वती की पूजा करते है। बसंत पंचमी न ही सिर्फ भारत में मनाया जाता है बल्कि भारत के पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश ,नेपाल में काफी ही धूम -धाम और उल्लास के साथ मानते है। इस साल यह त्यौहार 30 जनुअरी दिन गुरुवार को है।

 क्युकी इस बार हमलोग हमेशा की तरह सरस्वती पूजा को धूम -धाम  से मनाएंगे। बसंत पंचमी को हम सरस्वती पूजा और श्रीपंचमी के नाम से भी जाना जाता है। यह बसंत पंचमी का त्यौहार जो भारतीय स्कूल में मानते है। और रोजाना विद्या की देवी माँ सरस्वती को मनाकर रोजाना पूजा किया जाता है।

बसंत ऋतू का स्वागत करने भगवन विष्णु और कामदेव की पूजा करने का भी विधान है, इसलिए इसे बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता अनुसार इस दिन कामदेव अपने पत्नी के साथ रति के साथ आते और पुरे प्रकृति में प्रेम रस संचार करते है। इस दिन माता सरस्वती के साथ कामदेव और उनकी पत्नी रति का भी पूजा करने का है विधान है। सस्त्रो के अनुसार पूर्वाह्न से पहले माता सरस्वती की पूजा करने का नियम बताया गया है।

बसंत पंचमी की कुछ अनोखी बाते जो आपको पता रहना चाहिए 
 

बसंत पंचमी का महत्व 

भारतीय मानयता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन से ही भयंकर सर्दिया काम होने लगती है। और बच्चो को पढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण हो जाता है। भारत में 6 ऋतुओं में बसंत ऋतू को सबसे श्रेष्ठ मना गया है। क्युकी इस बसंत ऋतू आते ही।

 मनो प्रकृति में नई उमंग उभरने लगता है। बसंत ऋतू के आते ही इंसान ही नहीं बल्कि पशु -पछि में भी नई उलास के साथ खुश रहते है। बसंत ऋतू को प्रकृति पे समर्पित है क्युकी बसंत ऋतू के आते ही पेड़ो के पत्त्ते में नये पत्ते आने लगते है। और कालिया खिलने लगते है।

 खेतो में लगया गया सरसो जो उभरने लगता है। और इस दिन आम के पेड़ के फूल चारो तरफ हरियाली और खुशहाली का मौसम वह हलकी गुलाबी ठण्ड जो प्रकृति को सुहाने पण का अनुभव करता है। हमारे जीवन का उदेश्य को सफल करने में मदद करता है। बसंत ऋतू सभी ऋतू में सबसे खास माना गया है। 

बसंत पंचमी का ऐतहासिक महत्व। 

मान्यता के अनुसार देखा जाय तो जब व्रह्मा जी ने जब मनुष्य और जीवो की रचना कर दी थी इसके बाद व्रह्म जी ने सृष्टी को जब देखते है तो उन्हें चारो तरफ सिर्फ शांत सुनसान वातावरण ही दिखाई देता है। उनहोंने चारो तरफ देखते है ,और सोचते है की कोई कुछ बोल नहीं रहा है।

 इस पर व्रह्मा जी मायूस हो जाते है। तभी व्रह्मा जी भगवान विष्णु से आज्ञा लेकर अपना कमंडल उठाकर उसमे जल पिरथवी पड़ छिड़कते है , तभी पृथ्वी हिलने लगती और एक सुन्दर स्त्री प्रकट होती है ,उस देवी के हाथ में विणा और दूसरे हाथ वर मुद्रा तथा अन्य हाथो में पुस्तक और माला होती है।

 व्रह्मा जी ने उस स्त्री से निवेदन करते है की विणा बाजने के लिए कहते है इस तरह देवी के विणा बजाते ही पूरा जिव जंतु की आवाज मिल गयी। मान्यता अनुसार उस दिन सरस्वती नाम दिया गया और वह बसंत पंचमी का दिन था। उसी दिन माँ सरस्वती का जन्म दिवस के रूप में आज भी उनका जन्मदिवस बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है।


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1 Comments

  1. It's a festival of pure believers ...on this day they pray inside of their hearts to reach God ..

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