बसंत पंचमी 2020 की कुछ अनोखी बाटे जो आपको पता रहना चाहिए।

Basant panchami

बसंत पंचमी एक हिन्दू त्यहारा है। इस दिन विद्या की देवे माँ सरस्वती की पूजा धूम -धाम से मानते है। यह पूजा
पूर्वी भारत में नेपाल , बंगलादेश और कई राष्ट्र में बड़े उल्लास के साथ मानते है। इस दिन महिला अपना वस्त्र पीला पहनती है। 

प्राचीन भारत और नेपाल में जो छ महीना में जो मनचाहा ऋतू होती है वो वसंत ऋतू होती थी। बसंत ऋतू में सरसो खेतो में चमकाने लगते है, खेतो में गेहू और जौ उगने लगते है। आम के पेड़ो पे बौर आ जाते है। 
चारो तरफ आकाश में रंग -बिरंगे तितलियाँ उड़ने लगती है। चारो तरफ भवरे भवराने लगते है , वसंत ऋतू के 
सवागत के माघ महीने के पाचवे दिन वसंत ऋतू का स्वागत करते है। इस जसन मानते है। कहा जाता है माँ सरस्वती ज्ञान की देवी है ,इसलिए लोग इनका पूजा ज्ञान पाने के लिए करते है। इस दिन पूजा के समय अपने कलम -कॉपी उनके ऊपर रखते है। 

वसंत पंचमी की अनोखी कहनी 

सिरिस्टी के प्रारम्भिक कल में भगवन विष्णु आज्ञा पर व्रह्मा ने मनुष्य को तो बना दिया था ,पर लेकिन वह बात से खुश नहीं थे ,क्युकी चारो तरफ शांति ही थी , सब मौन था , तब विशुनु आज्ञा लेकर व्रह्मा  ने अपना कमंडल 
उठाया और पानी छींटे जिससे थोड़ी देर कम्पन हुआ और एक अद्भुत स्त्री की उतपति हुए जो दीखने में बहुत सुन्दर थी। उसने अपने हाथ में एक  विणा लिए ,एक हाथ में वर माला थी ,तीसरे हाथ में पुस्तक थी ,तथा चौथे हाथ में माला थे।  व्रह्मा ने अनुरोध किया की विणा बजने के लिए।  जैसे उन्होंने विणा वजाइये पूरा संसार को वाणी प्राप्त हो गया। जलधारा में कोहल मचने लगा। पवन सरसाने लगी। तभी व्रह्मा ने इन्हे वाणी की देवे सरस्वती कहा। संगीत के उतपति करने के कारन इन्हे संगीत का देवी भी कहा जाता है।  वसंत पंचमी के इस दिन माँ सरस्वती का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। 

वसंत पंचमी पर्व का महत्व 

वसंत ऋतू के आते ही चारो फुले खिल जाती है। चारो तरफ खुशिया ही खुसिया रहती है। मानव तो क्या पसु पछि 
उल्लास से भर जाते है। हर दिन नयी सूर्योदय होता है। और नए चेतना देकर चली जाती है। 
यह महत्व खास तौर पे कलाकारों के लिए वसंत पंचमी है। इस माँ सरस्वती की वंदना करके सभी अपने काम करते है। 

इस साल बसंत पंचमी कब है। और कैसे इनकी पूजा करे 

इस साल वसंत पंचमी 29 january को है। इस दिन माँ सरस्वती की विधि द्वारा पूजा की जाती है। 
यह ज्ञान की देवी है ,इसलिए इन्हे  वीणादेवी भी कहा जाता है। 
इनको अनेक नाम से जाना जाता है। जैसे - हंसवाहिनी यह अपना सवारी हंस पे करती  है इसलिए इन्हे हंसवाहिनी भी खा जाता है। इन्हे संगीत का देवी भी कहते है क्युकी इन्हे ने संगीत का निर्माण किया था। 

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