Makar sankaranti 2020 विभिन्न नमो से भारत में इसे बोलते है।

Makar sankranti

मकर संक्रांति को लेकर लोगो को हमेशा उलझने बानी रहती है। क्युकी लोग सोचते है। मकर संक्राति 14 January को है या 15 January को।  अगर आपके मन कुछ उलझने है की मकर संक्राति 14 को है या 15 .
जोय्तिष के अनुसार इन साल मकर संक्राति 15 January को है। 

मकर संक्रांति हिन्दुओ का महत्वपूर्णपर्व है। इसे पुरे भारत में और नेपाल में भी मनाते है। यह मकर संक्रांति पौष मास जब सूर्य मकर राशि पे आता है ,तो इस पर्व को मनाते है। वर्तमान समय में हमलोग यह पर्व 14 या 15 January को मनाते है। यह पुरे भारत में अलग नाम  से जाना जाता है ये पर्व का नाम ये पर्व नेपाल में भी मनाते है। 

विभिन्न नमो से भारत में इसे बोलते है। 

मकर संक्राति के नाम से -  उत्तर प्रदेश ,बिहार , तेलंगाना ,जम्मू , मध्यप्रदेश ,महाराष्ट , मणिपुर , पचिमबंगल ,
राजस्थान ,उत्तराखंड , गुजरात ,झारखण्ड , कर्नाटक ,केरल , गोवा , छतीशगढ , और सिक्किम इन जगह  पे 
मकर संक्रांति के नाम से लोग इस पर्व को धूम -धाम से मनाते है। 

उझ्वर तिरुनल -  तमिल नाडु में मकर संक्राति को लोग इस नाम से मानते है। 

उत्तररायण - के नाम से लोग गुजरात , उत्तरखंड में मानते है। 

माघी - हरियाणा, हिमाचलप्रदेश ,पंजाब 

भोगली बिहू - असम 

खिचड़ी - उत्तरप्रदेश, और पचिमी बिहार में मकर संक्राति को वहॉ के  खिचड़ी कहते है। 

पौष संक्रांति - पछिम बंगाल 

मकर संक्रमण - कर्णाटक 

लोहड़ी - पंजाब 

भारत में मकर संक्राति कैसे मानते है। 

सम्पूर्ण भारत में मकर संक्रांति विभिन्न रूप में मनाया जाता है।  विभिन्न  प्रांतो में ये पर्व जितने मानाने प्रचलित है ,
वो किसी और पर्व में नहीं। 
हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है , इस अवसर पे लोग मूंगफली बताकर एक दूसरे के साथ खुशिया मानते है। 

उत्तर प्रदेश में यह पर्व मुख्य तौर्य से दान का पर्व है। इस दिन वे लोग गंगा में स्नान करके व्रह्मणो को दान देते है। 
और अपना मुँह मीठा खिचड़ी कहते है। और खिचड़ी का दान देते है। 

बिहार में इस मकर संक्राति को लोग दही -चूड़ा खाकर मानते है। कम्बल वस्त्र का दान देते है। 

महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिला अपनी पहली संक्राति पे सुहागिन औरत को दान देती है। 
और तिल गुल नमक हलवे बताने के प्रथा भी है। 

बंगाल में इस दिन लोग गंगा में सनान करके तिल दान करते है। इस साल में प्रति वर्ष गंगासागर में विशाल मेला लगाती है। इस दिन गंगासागर में सनान करने के लिए लाखो -लाखो की भीड़ लगी रहती है। 

तमिलनाडु में लोग इस त्यौहार को पोंगल की तरह चार दिन तक मानते है। 

असम में लोग माघ बिहू के नाम से मानते है। 

राज्शथान में इस पर्व में महिला अपने सास को व्याना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती है। 

मकर संक्रांति का क्या महत्व है। 

शास्त्रों के अनुसार दाक्षिण्यान के देवताओ को रात्रि अर्थात =नाकरमात्मक का प्रतिक है। उत्तरनारयण अर्थात सकरात्मक का प्रतिक है। इसलिए इस दिन जप ,तप , दान , सनान ,श्रद्धा ,धार्मिक किर्याकल्पो का बहुत महत्व है। इस अवसर पर दान दिए गे चीज वापस सौ गुना बढ़ कर आता है। इस दिन सुध घी एवं कम्बल का दान 
मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

मकर संक्रांति का ऐतहासिक महत्व 

ऐसा मान्यता है की भगवन सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उसके घर जाते है। चुकी शनिदेव मकर राशि के स्वामी है। इस मकर संक्रांति के नाम से जाने जाती है। महाभारत कल में विषम पितामह अपने देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति दिन का चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही भगीरथ के पीछे चलकर गंगा जी आयी थी। 

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